बीटीसी 2012 : शासन बीटीसी चयन प्रक्रिया में हस्तक्षेप के पक्ष में नहीं

  • चयन सूची पर लगी रोक न हटने से अभ्यर्थियों में ऊहापोह
  • डायट प्राचार्य भी असमंजस में
जागरण ब्यूरो, लखनऊ : बीटीसी चयन सूची 2012 पर लगी रोक जारी रहने से अभ्यर्थियों में ऊहापोह बरकरार है। हालांकि शासन बीटीसी चयन प्रक्रिया के लिए अपनायी गई ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में हस्तक्षेप के पक्ष में नहीं है। गौरतलब है राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) के निदेशक महेंद्र सिंह ने 15 दिसंबर को बीटीसी चयन सूची को जारी करने पर रोक लगा दी थी। रोक लगाने की वजह जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) के प्राचार्यों को प्राप्त हुए अभ्यर्थियों के प्रत्यावेदन थे जिसमें उन्होंने कहा था कि ऑनलाइन आवेदन भरते समय उनसे कुछ गलतियां हो गईं जिन्हें सुधार दिया जाए। इस मसले का हल निकालने के लिए 18 दिसंबर को निदेशक एससीईआरटी ने डायट प्राचार्यों के साथ बैठक भी की थी जो बेनतीजा रही। चयन सूची पर लगी रोक हटाने के बारे में एससीईआरटी से कोई दिशानिर्देश न मिलने से डायट प्राचार्य भी असमंजस में हैं। शासन के अधिकारियों का कहना है कि पूर्व में हुए बीटीसी व विशिष्ट बीटीसी चयन में हुईं धांधलियों को रोकने के लिए ही ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया अपनायी गई है। इसमें हस्तक्षेप की गुंजाइश नहीं है। यदि अभ्यर्थियों ने ऑनलाइन आवेदन भरने में गलती की है तो इसके लिए चयन प्रक्रिया को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। आवेदन फॉर्म को मैनुअली भरने में भी यदि अभ्यर्थी से गलती होती तो भी उसका फार्म रद हो जाता। उनके मुताबिक हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक ने भी माना है कि ऑनलाइन आवेदन को भरने में यदि कोई चूक होती है तो इसके लिए अभ्यर्थी स्वयं जिम्मेदार है। अधिकारियों का यह भी कहना है कि चयन प्रक्रिया को संपन्न कराकर सफल अभ्यर्थियों की सूची जारी करने के बारे में एससीईआरटी को पहले ही आदेश जारी किये जा चुके हैं। एससीईआरटी को शासन के दिशानिर्देशों के अनुसार कार्यवाही सुनिश्चित करनी चाहिए।


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